विभाजन के 12 साल बाद भी ‘न्याय’ का इंतज़ार: डॉ. के. ए. पॉल का केंद्र और राज्य सरकारों को अल्टीमेटम

विभाजन के 12 साल बाद भी 'न्याय' का इंतज़ार: डॉ. के. ए. पॉल का केंद्र और राज्य सरकारों को अल्टीमेटम

“आंध्र और तेलंगाना के साथ विश्वासघात बंद करो” – डॉ. पॉल ने मुख्यमंत्री नायडू और जगन रेड्डी को 21 जनवरी तक दी कोर्ट में जवाब दाखिल करने की मोहलत

प्रजा शांति पार्टी के अध्यक्ष डॉ. के. ए. पॉल ने आज नई दिल्ली के आंध्र भवन में हुंकार भरते हुए केंद्र सरकार और आंध्र-तेलंगाना के राजनीतिक नेतृत्व को आड़े हाथों लिया। उन्होंने 2014 के विभाजन के समय किए गए अधूरे वादों को ‘तेलुगु जनता के साथ ऐतिहासिक धोखा’ करार दिया।

कोर्ट के आदेश के बावजूद 18 महीने की देरी पर उठाए सवाल

डॉ. पॉल ने कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा और वित्तीय सहायता दिलाने का मामला उच्च न्यायालय में है।

“माननीय न्यायमूर्ति नरेंद्र के आदेश के बावजूद केंद्र सरकार, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने 18 महीने से चुप्पी साधी हुई है। आखिर ये नेता अदालत को जवाब देने से क्यों डर रहे हैं?”

डॉ. पॉल ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 21 जनवरी 2026 तक अदालत में जवाब दाखिल नहीं किया गया, तो वे इस कानूनी लड़ाई को और तेज करेंगे।

प्रमुख विकास एजेंडा: जो अब तक अधूरे हैं

उन्होंने दोनों राज्यों के लिए निम्नलिखित माँगों को तत्काल पूरा करने पर जोर दिया:

आंध्र प्रदेश की प्राथमिकताएं:

  • विशेष श्रेणी का दर्जा (SCS) या उसके बराबर का वित्तीय पैकेज।
  • विशाखापत्तनम स्टील प्लांट को बिकने से बचाना और उसका संरक्षण।
  • पोलावरम परियोजना और रेलवे ज़ोन की तत्काल स्थापना।

तेलंगाना की उपेक्षित मांगें:

  • काजीपेट रेल कोच फैक्ट्री और बय्यारम स्टील प्लांट का निर्माण।
  • पालमुरु-रंगारेड्डी परियोजना को ‘राष्ट्रीय परियोजना’ का दर्जा देना।
  • केंद्रीय संस्थानों (एनटीपीसी, बागवानी विश्वविद्यालय) की समयबद्ध स्थापना।

समान विकास की मांग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए डॉ. पॉल ने कहा कि भारत का विकास तभी संभव है जब हर राज्य को उसका संवैधानिक हक मिले। उन्होंने तेलुगु समाज से अपील की कि वे अपने अधिकारों के लिए अब और चुप न रहें।

डॉ. पॉल ने उद्योगपति अनिल अग्रवाल के पुत्र अग्निवेश अग्रवाल के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह व्यापारिक जगत और अग्रवाल परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

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