ओए-ओए गाना सुनकर नाचे रणवीर, लेकिन अब कोर्ट में मामला! क्या पुराने iconic गानों को रीक्रिएट करना अब बॉलीवुड में खतरनाक हो गया?
नई दिल्ली: रणवीर सिंह की फिल्म Dhurandhar 2 बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है, लेकिन इसी बीच कानूनी विवाद ने कहानी में नया मोड़ ला दिया है। फिल्म में 80 के दशक के iconic गाने ‘OYE-OYE’ के इस्तेमाल को लेकर कानूनी पचड़ा खड़ा हो गया है। त्रिमूर्ति फिल्म्स ने निर्देशक आदित्य धर और उनके प्रोडक्शन हाउस B62 स्टूडियोज के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में मुकदमा दायर कर दिया है।
यह मामला सिर्फ एक गाने या एक फिल्म तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़े सवाल को सामने ला रहा है कि कॉपीराइट और क्रिएटिव फ्रीडम के बीच की लाइन कहां खत्म होती है?
रीक्रिएशन बना मुसीबत, कोर्ट में सख्त कदम उठाने की अपील
Trimurti Films का आरोप है कि धुरंधर 2 में गाने की मूल धुन, उसकी एनर्जी और कुछ लिरिकल टोन को बिना अनुमति या रॉयल्टी दिए रीक्रिएट किया गया है। फिल्म की म्यूजिक टीम ने इसे आधुनिक बीट और नई पीढ़ी के स्वाद के हिसाब से तैयार किया, लेकिन राइट्स होल्डर्स का कहना है कि “रीक्रिएशन भी मूल काम का ही हिस्सा होता है, और बिना इजाज़त यह स्वीकार्य नहीं है।”
मुकदमे में मांग की गई है-
गाने वाले सीन को तुरंत हटाने या रोकने का आदेश।
भारी मुआवजा।
फिल्म के आगे प्रचार और स्क्रीनिंग पर अस्थायी रोक।
रीमेक ट्रेंड पर बड़ा सवाल
आजकल बॉलीवुड में रीमेक, सीक्वल और होमेज कल्चर तेज़ी से बढ़ रहा है। फिल्ममेकर्स का मानना हैं कि पुरानी iconic धुनें नॉस्टेल्जिया जगाती हैं और नई पीढ़ी को भी आकर्षित करती हैं, लेकिन कानूनी रूप से यह खेल खतरनाक साबित हो रहा है-
कॉपीराइट की लंबी उम्र: भारत में किसी रचना का कॉपीराइट उसके रचनाकार की मृत्यु के बाद 60 साल तक सुरक्षित रहता है। ऐसे में 1989 की फिल्म Tridev के गाने आज भी पूरी तरह संरक्षित हैं।
रीक्रिएशन भी जोखिम भरा: सिर्फ कॉपी ही नहीं, बल्कि “सब्स्टेंशियल सिमिलैरिटी” यानी काफी हद तक मिलती-जुलती धुन या टोन भी मुकदमे का आधार बन सकती है।
निर्देशक Aditya Dhar, जिन्होंने Uri: The Surgical Strike जैसी सफल फिल्म दी, अब Dhurandhar 2 के चलते इसी मुद्दे में घिरते नजर आ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक उनकी टीम मानती है कि यह “ट्रिब्यूट” था, लेकिन कानूनी रूप से ट्रिब्यूट भी लाइसेंस के बिना मान्य नहीं होता।
पुरानी धुनों का सहारा या नई सोच की कमी?
यह पूरा मामला बॉलीवुड के रीमेक-सीक्वल-रीक्रिएट कल्चर पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है-क्या इंडस्ट्री इतनी ज्यादा पुरानी क्रिएटिव संपत्ति पर निर्भर हो गई है कि ओरिजिनलिटी अब कम होती जा रही है? कई युवा डायरेक्टर्स मानते हैं कि ओरिजिनल स्क्रिप्ट और गाने बनाना महंगा और जोखिम भरा होता है, जबकि पुरानी हिट चीजें दर्शकों से तुरंत जुड़ जाती हैं।
हालांकि, कॉपीराइट क्लियरेंस की जटिल और महंगी प्रक्रिया छोटे और मध्यम बजट के प्रोजेक्ट्स के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही है। वहीं दूसरी तरफ पुराने म्यूजिक राइट्स होल्डर्स का साफ कहना है कि उनकी मेहनत और रचनात्मकता का इस्तेमाल बिना उचित अनुमति और सम्मान के नहीं किया जाना चाहिए।
क्रिएटिव फ्रीडम बनाम कॉपीराइट
धुरंधर 2 अभी भी थिएटरों में जबरदस्त कमाई कर रही है, लेकिन इसके साथ ही कानूनी मामला भी तूल पकड़ता जा रहा है। अगर दोनों पक्ष आपसी समझौते पर पहुंचते हैं तो मामला शांत हो सकता है। लेकिन कोर्ट सख्त रुख अपनाया तो फिल्म के फ्यूचर स्क्रीनिंग्स और डिजिटल रिलीज पर असर पड़ सकता है।
यह मामला पूरे इंडस्ट्री के लिए सबक है कि क्रिएटिव फ्रीडम का मतलब “फ्री” नहीं, बल्कि “राइट्स के साथ” दायरे में रहकर काम करना है।
