Home Remedies: UTI में क्रैनबेरी जूस क्यों है सबसे कारगार उपाय? जानें

UTI में क्रैनबेरी जूस क्यों है सबसे कारगार उपाय जानें

Home Remedies: बार-बार होने वाले UTI से बचने के लिए क्रैनबेरी जूस, प्रोबायोटिक्स और विटामिन C जैसे प्राकृतिक उपायों पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट? जानें लक्षण और बचाव के आसान तरीके।

नई दिल्ली: मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI) महिलाओं में होने वाली सबसे आम स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। भारत में भी हर साल बड़ी संख्या में लोग इससे प्रभावित होते हैं। यह संक्रमण आमतौर पर बैक्टीरिया, खासकर ई. कोलाई (Escherichia coli) के कारण होता है, जो मूत्रमार्ग या मूत्राशय में पहुंचकर जलन, बार-बार पेशाब आने, पेशाब करते समय दर्द और कभी-कभी बुखार जैसी दिक्कतें पैदा करता है।

डॉक्टर आमतौर पर इसके इलाज के लिए एंटीबायोटिक्स देते हैं, लेकिन बार-बार होने वाले यूटीआई (UTI) के मामलों में एंटीबायोटिक दवाओं का असर कम होने की समस्या भी सामने आ रही है। इसी वजह से कई लोग संक्रमण से बचाव के लिए प्राकृतिक और घरेलू उपायों की ओर रुख कर रहे हैं। हाल के वर्षों में हुई कई स्टडीज से यह संकेत मिला है कि कुछ प्राकृतिक तरीके यूटीआई (UTI) के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं, हालांकि संक्रमण होने के बाद इलाज के लिए डॉक्टर की दवा जरूरी रहती है।

क्रैनबेरी पर सबसे ज्यादा रिसर्च

यूटीआई की रोकथाम के लिए क्रैनबेरी उत्पादों को सबसे ज्यादा अध्ययन किया गया है। Cranberry जूस, पाउडर या कैप्सूल में पाए जाने वाले प्रोएंथोसायनिडिन (PACs) नामक तत्व बैक्टीरिया को मूत्र मार्ग की दीवार से चिपकने से रोकने में मदद करते हैं।

2024 और 2025 में प्रकाशित कई अध्ययनों में पाया गया कि हाई-डोज PACs वाले क्रैनबेरी उत्पाद नियमित लेने से बार-बार होने वाले यूटीआई के मामलों में कमी आ सकती है। कुछ स्टडीज में महिलाओं में संक्रमण का खतरा लगभग आधा तक कम होने के संकेत भी मिले हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना शुगर वाला 100 प्रतिशत क्रैनबेरी जूस या स्टैंडर्डाइज्ड सप्लीमेंट ज्यादा प्रभावी माने जाते हैं।

यूटीआई से बचाव के लिए अन्य प्राकृतिक विकल्प भी मौजूद

कुछ विशेषज्ञ D-Mannose को भी यूटीआई की रोकथाम में सहायक मानते हैं। यह एक प्राकृतिक शुगर है जो कुछ फलों में पाया जाता है और बैक्टीरिया को मूत्राशय की दीवार से चिपकने से रोकने में मदद कर सकता है। हालांकि हाल के शोधों में इसके असर को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है।

इसी तरह विटामिन C भी संक्रमण से बचाव में सहायक माना जाता है क्योंकि इससे मूत्र अधिक अम्लीय हो जाता है, जिससे बैक्टीरिया का बढ़ना मुश्किल हो जाता है। आंवला, नींबू और संतरे जैसे फलों से इसकी पर्याप्त मात्रा मिल सकती है।

इसके अलावा प्रोबायोटिक्स जैसे दही और लैक्टोबैसिलस वाले खाद्य पदार्थ भी शरीर में अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। खासकर एंटीबायोटिक्स के बाद इनका सेवन फायदेमंद माना जाता है।

ये भी पढ़े:- Home Remedies: समय से पहले सफेद बालों से परेशान? जानिए 5 आसान घरेलू उपाय

घरेलू उपाय भी कर सकते हैं मदद

  1. लहसुन: इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। रोजाना खाने में डालें या सप्लीमेंट लें।
  2. सेब का सिरका: गुनगुने पानी में 1-2 चम्मच + शहद मिलाकर पीने से जलन कम हो सकती है।
  3. धनिया पानी या चावल का पानी: आयुर्वेद में ठंडक देने और जलन कम करने के लिए इस्तेमाल होता है।
  4. गर्म सेक (Heating Pad): पेट पर गर्म पानी की थैली रखने से दर्द और दबाव में राहत मिलती है।

डॉक्टर की सलाह जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि प्राकृतिक उपाय यूटीआई से बचाव में मददगार हो सकते हैं, लेकिन अगर संक्रमण गंभीर हो जाए जैसे तेज दर्द, पेशाब में खून या बुखार तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेना जरूरी है। इलाज में देरी होने पर संक्रमण किडनी तक फैल सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार साफ-सफाई का ध्यान रखना, पर्याप्त पानी पीना और संतुलित आहार लेना मूत्र प्रणाली को स्वस्थ रखने के सबसे आसान और प्रभावी तरीके हैं।

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी पारंपरिक मान्यताओं और उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है। इसे किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह या उपचार का विकल्प न समझें। Jankiawaaz इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक या संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *