नई दिल्ली: देश में बढ़ती गर्मी को लेकर इस बार हालात और गंभीर होते दिख रहे हैं। India Meteorological Department (IMD) ने चेतावनी दी है कि 2026 का ग्रीष्मकाल कई इलाकों में सामान्य से ज्यादा गर्म रहने वाला है। खास बात यह है कि इस बार असर सिर्फ मैदानी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पहाड़ी इलाके, पूर्वोत्तर राज्य और पश्चिमी घाट भी तेज गर्मी की चपेट में आ सकते हैं।
2026 में क्या है खास खतरा?
तापमान में लगातार बढ़ोतरी
विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों से तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। 2024 से शुरू हुआ यह ट्रेंड 2025 में भी जारी रहा और अब 2026 में इसके और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।
IMD के अनुसार, मार्च से मई के बीच हीटवेव की संख्या और उसकी तीव्रता बढ़ सकती है। इसके साथ ही रात के तापमान में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे शरीर को ठंडक मिलने का समय कम हो जाएगा।
किसानों और मजदूरों पर सीधा असर
इस बढ़ती गर्मी का सबसे ज्यादा असर किसानों और खुले में काम करने वाले लोगों पर पड़ सकता है। देश की बड़ी कृषि भूमि अब भी बारिश पर निर्भर है, ऐसे में तापमान बढ़ने से फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा है।
पिछले साल गेहूं, सरसों और कई फलों-सब्जियों पर गर्मी का असर देखा गया था। इस बार हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। वहीं, ज्यादा तापमान के चलते हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ने का खतरा भी बना हुआ है।
सिर्फ मौसम नहीं, बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं है। बढ़ती गर्मी का असर पानी की उपलब्धता, बिजली की मांग और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। शहरों में बिजली की खपत बढ़ रही है, जबकि ग्रामीण इलाकों में पानी की कमी की समस्या गहराने लगी है।
गर्मी से बचाव के लिए क्या करें?
- दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक बाहर निकलने से पूरी तरह बचें
- दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं (हर 1-2 घंटे में)
- नमक-चीनी का ORS घोल या नींबू पानी पीते रहें
- हल्के, ढीले और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें
तेजी से बढ़ती गर्मी यह संकेत दे रही है कि आने वाले समय में जलवायु से जुड़ी चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं, जिनसे निपटने के लिए समय रहते तैयारी जरूरी है।
