बिहार से बॉलीवुड तक सुशांत सिंह राजपूत का सफर सिर्फ स्टारडम हासिल करने की कहानी नहीं था, बल्कि यह सोच, मेहनत और सपनों को हकीकत में बदलने की एक प्रेरणादायक उड़ान थी।
नई दिल्ली: 21 जनवरी की तारीख बॉलीवुड के उस कलाकार की याद दिलाती है, जो सिर्फ पर्दे पर किरदार निभाने तक सीमित नहीं था। सुशांत सिंह राजपूत आज भले ही हमारे बीच मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी सोच, उनका काम और उनका सपना आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। वह उन चुनिंदा कलाकारों में से थे, जिनके लिए अभिनय के साथ-साथ ज्ञान, विज्ञान और ब्रह्मांड भी उतना ही जरूरी था।
बिहार से उभरी एक अनोखी पहचान
21 जनवरी 1986 को बिहार की राजधानी पटना में जन्मे सुशांत का बचपन का नाम गुलशन था। चार बहनों के बीच पले-बढ़े सुशांत परिवार के इकलौते बेटे थे। बचपन से ही वह पढ़ाई में तेज और स्वभाव से संवेदनशील थे। साल 2002 में मां के निधन ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया, जिसके बाद उनका परिवार दिल्ली आ गया।
दिल्ली आने के बाद सुशांत की प्रतिभा और निखरकर सामने आई। 11वीं कक्षा में उन्होंने फिजिक्स ओलंपियाड में गोल्ड मेडल हासिल किया। इतना ही नहीं, देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग परीक्षाओं में गिनी जाने वाली AIEEE में उन्होंने ऑल इंडिया 7वीं रैंक प्राप्त की और दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में दाखिला लिया।
इंजीनियर से कलाकार बनने का सफर
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही सुशांत का झुकाव परफॉर्मिंग आर्ट्स की ओर होने लगा। उन्होंने श्यामक डावर के डांस ग्रुप से जुड़कर प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली और कई प्रोजेक्ट्स में बैकग्राउंड डांसर के तौर पर काम किया। अभिनय की बारीकियां सीखने के लिए उन्होंने बैरी जॉन एक्टिंग स्टूडियो में भी ट्रेनिंग ली।
टीवी से मिली पहचान, फिल्मों का सपना
सुशांत ने टीवी शो ‘किस देश में है मेरा दिल’ से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा, लेकिन असली लोकप्रियता उन्हें ‘पवित्र रिश्ता’ में मानव के किरदार से मिली। यह किरदार घर-घर में पहचाना जाने लगा, लेकिन सुशांत का सपना इससे कहीं बड़ा था। वह बड़े पर्दे पर खुद को साबित करना चाहते थे।
बॉलीवुड में अलग पहचान
फिल्म ‘काय पो छे’ के जरिए सुशांत सिंह राजपूत ने बॉलीवुड में कदम रखा और शुरुआत से ही अपनी अलग पहचान बना ली। इसके बाद ‘शुद्ध देसी रोमांस’ जैसी फिल्मों ने उन्हें युवा दर्शकों का चहेता बना दिया। हालांकि, करियर का सबसे अहम मोड़ ‘MS Dhoni: The Untold Story’ साबित हुई, जहां उन्होंने महेंद्र सिंह धोनी के किरदार को पर्दे पर जीवंत कर दिया।
सितारों से था खास रिश्ता
सुशांत सिर्फ एक्टर नहीं थे, वह एक सोचने-समझने वाले इंसान थे। उनके पास 200 किलो वजनी टेलीस्कोप था, जिससे वह अक्सर आकाशगंगाओं, ब्लैक होल और तारों का अध्ययन करते थे। उन्हें एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी और स्पेस साइंस में गहरी रुचि थी। वह कहते थे कि अगर एक्टर नहीं बनते, तो वैज्ञानिक जरूर होते।
एक अधूरी कहानी
करियर के शिखर पर पहुंचने के बावजूद 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत के निधन की खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया। उनका जाना आज भी कई सवाल छोड़ गया है। फैंस के लिए वह सिर्फ एक एक्टर नहीं, बल्कि एक प्रेरणा थे।
आज उनके जन्मदिन पर, सुशांत सिंह राजपूत को याद करना सिर्फ एक कलाकार को याद करना नहीं, बल्कि उस जिज्ञासा को सलाम करना है, जो सितारों तक पहुंचना चाहती थी।
