Teachers’ Day 2025 : गुरु-शिष्य परंपरा जिसने भारत को बनाया विश्व का ज्ञान केंद्र
नई दिल्ली, 02 सितंबर 2025
Teachers’ Day केवल एक दिन नहीं, बल्कि यह परंपरा और संस्कारों का पर्व है। भारत की धरती ने हमेशा से ज्ञान और अध्यापन की ऐसी अनमोल परंपरा को जन्म दिया है, जिसकी मिसाल पूरी दुनिया देती है। यही कारण है कि नालंदा, तक्षशिला और शांति निकेतन जैसे शिक्षा धाम केवल विश्वविद्यालय नहीं रहे, बल्कि भारतीय सभ्यता और वैचारिक धरोहर के जीवंत प्रतीक बने।
नालंदा: ज्ञान का महासागर
बिहार की धरती पर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय 5वीं सदी में स्थापित हुआ था। इसे विश्व का पहला आवासीय और अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय माना जाता है। यहां वेद, गणित, तर्कशास्त्र, खगोल विज्ञान और धर्म जैसे विषयों की पढ़ाई होती थी। नालंदा को “ज्ञान का महासागर” कहा जाता था, जहां हजारों विद्यार्थी और सैकड़ों आचार्य देश-विदेश से शिक्षा प्राप्त करने आते थे। चीन, मंगोलिया, तिब्बत, कोरिया और एशिया के कई देशों से विद्यार्थी यहां अध्ययन करने आते थे। यह न केवल शिक्षा का केंद्र था, बल्कि वैश्विक संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी प्रतीक रहा।
तक्षशिला: प्राचीन भारत का गौरव
वर्तमान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित तक्षशिला विश्वविद्यालय 7वीं शताब्दी ईसा पूर्व में अस्तित्व में आया। इसे मानव इतिहास का पहला ज्ञात विश्वविद्यालय माना जाता है। यहां 10,000 से अधिक विद्यार्थी और 200 से ज्यादा आचार्य मौजूद थे। राजनीति, अर्थशास्त्र, चिकित्सा, युद्धनीति और वेद अध्ययन जैसे विषय यहां सिखाए जाते थे। यही तक्षशिला वह स्थान था, जहां से पाणिनि, चाणक्य और चरक जैसे महाविद्वान निकले। आज यह यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल है।
शांति निकेतन: आधुनिक भारत का शिक्षा धाम
पश्चिम बंगाल में स्थित शांति निकेतन की नींव 1863 में महर्षि देवेंद्रनाथ टैगोर ने रखी थी। आगे चलकर रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे 1901 में गुरुकुल शैली के विद्यालय और 1921 में विश्व भारती विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया। यहां शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रकृति, कला, साहित्य और संगीत को भी बराबर महत्व दिया गया। यही कारण है कि शांति निकेतन ने भारतीय और पश्चिमी शिक्षा पद्धति का अनोखा संगम प्रस्तुत किया। हाल ही में इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर का दर्जा भी दिया है।
Teachers’ Day पर जब हम अपने गुरुओं और अध्यापक परंपरा को याद करते हैं, तब नालंदा, तक्षशिला और शांति निकेतन जैसे संस्थान हमें यह एहसास दिलाते हैं कि भारत की शिक्षा संस्कृति कितनी गहरी और महान रही है। ये धरोहरें केवल अतीत का गौरव नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा स्रोत हैं।
Suditi Raje has a background in investigative journalism, with a career spanning over 6 years. As part of the Jankiawaz team, she are committed to exposing the truth and bringing to light the stories that matter most.
